Monday, 21 March 2011

मद-मस्त पत्तियाँ

हवा के झोंकों में,
इठलाती हैं पत्तियाँ,
पवन के स्पर्श से,
सिहरती हैं पत्तियाँ,
सूर्य की रोशिनी से,
जीवन पाती हैं पत्तियाँ,
परन्तु पवन के झिंझोड़ने से ही,
खिलखिलाती है पत्तियाँ,
हवा के संगीत पर,
शब्द बिखेरती हैं पत्तियाँ,
सब छोड़ न्योछावर हो पवन पर,
मद-मस्त हो जाती हैं पत्तियाँ।

1 comment:

  1. क्या बात !! क्या बात !! क्या बात !!!

    अब हिन्दी में भी !!!!!!!! kool... m proud of u !!!

    ReplyDelete