Saturday, 26 March 2011

मैया का कन्नाहिय्या

तिरकिट तिरकिट दौड़े कन्नाहिय्या,
उछले बोले मैया मैया,
माखन खाऊँ, धूप में खेलूँ,
मटकी तोडूँ, रस बरसाऊँ,
रोक सके तो रोक ले मुझको,
लुक-छिप करके छकाऊँगा तुझको।

तिरकिट तिरकिट दौड़े कन्नाहिय्या,
उछले बोले मैया मैया,
शेर पे बैठूँ, कान मैं खीचूँ, 
पूँछ पे उसकी लटकूँ खेलूँ,
रोक सके तो रोक ले मुझको,
जँगल जँगल दौडाऊँगा तुझको। 

तिरकिट तिरकिट दौड़े कन्नाहिय्या,
उछले बोले मैया मैया,
चाँद पे जाऊँ, दाग हटाऊँ, 
उसको मन की बात बताऊँ,
रोक सके तो रोक ले मुझको,
तारों तारों कुदाऊँगा तुझको।

तिरकिट तिरकिट दौड़े कन्नाहिय्या,
उछले बोले मैया मैया,
बछिया चराऊँ, बंसी बजाऊँ,
साँझ सब संग ढोल बजाऊँ,
छिप सके तो छिप ले मैया,
तुझ बिन नाचे ना गाये कन्नाहिय्या.

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